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संयुक्त वक्तव्य: छठा भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श

मई 02, 2022

1. जर्मनी और भारत के बीच चांसलर ओलाफ शोल्ज और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सह-अध्यक्षता में, अंतर-सरकारी परामर्श की छठे दौर की बैठक हुई। इन दोनों नेताओं के अतिरिक्त, इस बैठक में शामिल दोनों प्रतिनिधिमंडलों में परिशिष्ट में उल्लिखित मंत्रालयों के मंत्री और अन्य प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

2. ऐसे समय में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, जर्मनी और भारत के बीच संबंधों की गहरी जड़ें परस्पर विश्वास, दोनों देशों के लोगों के​ हितों के लिए काम करने की साझा सोच,लोकतंत्र के साझा मूल्यों, कानून के शासन तथा मानवाधिकारों और वैश्विक चुनौतियों के संबंध में बहुपक्षीय प्रतिक्रियाओं में निहित हैं।

3. दोनों सरकारों ने संयुक्त राष्ट्र के साथ एक प्रभावी नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व और सभी राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान सहित, संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित अंतरराष्ट्रीय कानून के मूलभूत सिद्धांतों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करने और सुधारने, विश्व स्तर पर शांति और स्थिरता की रक्षा करने, अंतर्राष्ट्रीय कानून को मजबूत करने और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान और राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के मूलभूत सिद्धांतों की रक्षा करने के लिए अपनी सरकारों के दृढ़ संकल्प की पुष्टि की।

4. दोनों नेताओं ने विश्व की बेहतरी के लिए कोविड-19 महामारी से उबरने वाले आर्थिक सुधारों के लिए अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के उद्देश्य के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की और तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में मजबूत प्रयास करने पर सहमति जताई।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक सुधार ऐसे होने चाहिए जो पेरिस समझौते के तहत दोनों देशों द्वारा सतत विकास के लिए तय एजेंडा-2030 और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप सभी के लिए एक अधिक लचीला, पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ, जलवायु-अनुकूल और समावेशी भविष्य का निर्माण कर सकें।

साझा मूल्यों और क्षेत्रीय और बहुपक्षीय हितों की साझेदारी

5. संयुक्त राष्ट्र के साथ एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व के बारे में दृढ़ता से आश्वस्त होते हुए जर्मनी और भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान तथा प्रभावी और सुधारित बहुपक्षवाद के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, गरीबी, वैश्विक खाद्य सुरक्षा तथा लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा करने वाले तत्वों जैसे गलत सूचना, अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष और संकट तथा अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद जैसी दबाव वाली वैश्विक चुनौतियों के आलोक में बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार के लिए अपने आह्वान को नए सिरे से अभिव्यक्त किया। "ग्रुप आफ फोर यानी कि चार के समूह" के लंबे समय से सदस्य के रूप में, दोनों देशों की सरकारे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अरसे से लंबित सुधारों के लिए अपने प्रयास तेज करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि इसे इस उद्देश्य और समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के उपयुक्त बनाया जा सके। दोनों सरकारों ने कहा कि वह इस संबंध में प्रासंगिक चुनावों में एक दूसरे का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।जर्मनी ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत को शीघ्र सदस्य बनाए जाने के लिए अपना दृढ़ समर्थन दोहराया।

6. दोनों पक्षों ने आसियान के महत्व पर जोर देते हुए एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जर्मनी की संघीय सरकार की हिंद-प्रशांत नीति, हिंद-प्रशांत मामले में सहयोग के लिए यूरोपीय संघ की रणनीति और भारत द्वारा प्रतिपादित हिंद-प्रशांत सागर पहल को स्वीकार किया।दोनों पक्षों ने हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर सहित सभी समुद्री क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) 1982 के अनुसार निर्बाध वाणिज्य और आवागमन की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ जर्मनी के बढ़ते जुड़ाव में एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में, दोनों पक्षों ने जनवरी, 2022 में मुंबई में जर्मनी के नौसेना फ्रिगेट 'बायर्न' के पहुंचने का स्वागत किया। जर्मनी भी अगले साल अपने एक बंदरगाह पर भारतीय नौसैनिक जहाज के मैत्रिपूर्ण यात्रा पर आने का स्वागत करने के लिए सहमत हुआ।

7. भारत और जर्मनी विशेष रूप से मई, 2021 में पोर्टो में भारत-यूरोपीय संघ के नेताओं की बैठक के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक सहयोग को गहरा किए जाने का स्वागत करते हैं और इसे और मजबूत करने पर सहमत हुए हैं। वे भारत-यूरोपीय संघ संपर्क साझेदारी के कार्यान्वयन के लिए भी तत्पर हैं। दोनों पक्षों ने व्यापार, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों का समाधान करने में गहरे जुड़ाव को बढ़ावा देने वाले भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद के शुभारंभ पर संतोष व्यक्त किया।

8. दोनों पक्षों ने बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) के साथ-साथ जी20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इस संबंध में,विशेष रूप से 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान भारत और जर्मनी घनिष्ठ सहयोग के लिए उत्सुक हैं। जर्मनी ने भारत की ओर से उसकी जी-20 की प्राथमिकताओं की प्रस्तुति का स्वागत किया और आम वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए जी-20 की ओर से मजबूत कार्रवाई पर एक साथ काम करने पर सहमत हुए।

9. दोनों पक्षों ने वर्तमान में जर्मनी की जी-7 की अध्यक्षता के दौरान जी-7 और भारत के बीच घनिष्ठ सहयोग को स्वीकार किया, जिसमें न्यायोचित तरीके से ऊर्जा संसाधनों में परिवर्तन किया जाना भी शामिल है। वे जी-7 की जर्मनी की अध्यक्षता के तहत और अन्य सरकारों के साथ जलवायु-संगत ऊर्जा नीतियों और इसमें आने वाली चुनौतियों का समाधान करने ,अक्षय ऊर्जा का तेजी से इस्तेमाल करने और स्थायी ऊर्जा तक पहुंच के लिए संयुक्त रूप से काम करने के लिए एक संवाद स्थापित करने पर सहमत हुए । इसमें विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के लिए शमन-उन्मुख अनुकूलन भी शामिल किए जाने की संभावना है।

10. जर्मनी ने यूक्रेन पर रूसी सेनाओं द्वारा गैर-कानूनी तरीके से अकारण किए गए आक्रमण की एक बार फिर से कड़ी निंदा की। जर्मनी और भारत ने यूक्रेन में जारी मानवीय संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने यूक्रेन में नागरिकों की मौत की स्पष्ट शब्दों में निंदा की। उन्होंने शत्रुतापूर्ण कार्रवाई को तत्काल समाप्त करने की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समकालीन वैश्विक व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतर्राष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सम्मान और राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित है। उन्होंने यूक्रेन के साथ ही इसके व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की। दोनों पक्ष इस मुद्दे पर सघनता के साथ जुड़े रहने पर सहमत हुए।

11. दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान में,मानवीय स्थिति, लक्षित आतंकवादी हमलों सहित हिंसा के फिर से भड़कने, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के उल्लंघन और लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा तक पहुंच में बाधा के बारे में अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर अफगानिस्तान के लिए मजबूत समर्थन दोहराया और इस बात की पुष्टि की कि वह अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता देना जारी रखेंगे।

12. दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के प्रस्ताव 2593 (2021) के महत्व की फिर से पुष्टि की, जो अन्य बातों के साथ-साथ इस बात की स्पष्ट रूप से मांग करता है कि अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग आतंकवादी गति​विधियों को आश्रय देने, प्रशिक्षण देने या वित्तपोषण के लिए नहीं किया जाना चाहिए। वे अफगानिस्तान की स्थिति पर करीबी परामर्श जारी रखने पर भी सहमत हुए।

13. दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की, जिसमें परदे के पीछे से आतंकवादी गतिविधियां चलाने और सीमा पार आतंकवाद का भी इस्तेमाल किया जाना शामिल है। उन्होंने सभी देशों से अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून सहित अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार आतंकवादियों के सुरक्षित पनाहगाहों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने, आतंकवादी नेटवर्क और उनके वित्तपोषण को बाधित करने करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने आगे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा प्रतिबंधित समूहों सहित सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने आतंकवादी समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधों और पदनामों, कट्टरपंथ का मुकाबला करने और आतंकवादियों के इंटरनेट के उपयोग और उनकी सीमा पार गतिविधियों के बारे में सूचनाओं के निरंतर आदान-प्रदान के बारे में भी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

14. दोनों नेताओं ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स सहित सभी देशों द्वारा धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, जो वैश्विक सहयोग की व्यवस्था को आगे बढ़ाएगा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करेगा।

15. दोनों सरकारों ने संयुक्त व्यापक कार्य योजना की वार्ता संपन्न करने और उसके पूर्ण कार्यान्वयन के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। जर्मनी और भारत ने भी इस संदर्भ में आईएईए की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

16. सुरक्षा सहयोग को गहन करने की दृष्टि से, दोनों पक्ष वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान पर एक समझौते पर बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का संयुक्त रूप से समाधान करने के लिए सामरिक भागीदारों के रूप में द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता को स्वीकार किया।वे सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर द्विपक्षीय आदान-प्रदान को गति देने पर सहमत हुए। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने सक्रिय रूप से यूरोपीय संघ के तहत और अन्य भागीदारों के साथ अनुसंधान, सह-विकास और सह-उत्पादन गतिविधियों को द्विपक्षीय रूप से बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की। इस संबंध में, दोनों पक्ष नियमित द्विपक्षीय साइबर परामर्श जारी रखने और रक्षा प्रौद्योगिकी उप-समूह (डीटीएसजी) की बैठक को फिर से आयोजित करने पर सहमत हुए। दोनों सरकारों ने अपने देशों के बीच रक्षा सामानों सहित उच्च-प्रौद्योगिकी व्यापार को बढ़ाने के लिए समर्थन व्यक्त किया।

हरित और सतत विकास के लिए साझेदारी

17. दोनों सरकारों ने पृथ्वी की सुरक्षा तथा साझा, सतत और समावेशी विकास के क्रम में कोई भी पीछे न छूट जाए इसका ध्यान रखते हुए अपनी संयुक्त जिम्मेदारी को स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सतत विकास और जलवायु कार्रवाई पर भारत-जर्मन सहयोग पेरिस समझौते और एसडीजी के तहत भारत और जर्मनी की प्रतिबद्धताओं द्वारा निर्देशित है, जिसमें वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने और पूर्व-औद्योगिक स्तर पर तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों का अनुसरण करना शामिल है। वे इन प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए तत्पर हैं और इस संबंध में संयुक्त घोषणा पत्र में हरित और सतत विकास के लिए भारत-जर्मन साझेदारी की स्थापना की घोषणा का स्वागत किया।साझेदारी का उद्देश्य द्विपक्षीय, त्रिकोणीय और बहुपक्षीय सहयोग को गति देना और इसे पेरिस समझौते और एसडीजी के कार्यान्वयन पर दोनों पक्षों की मजबूत प्रतिबद्धता से जोड़ना होगा। यह देखते हुए कि एसडीजी की प्राप्ति और भारत और जर्मनी द्वारा ग्लासगो में सीओपी26 के दौरान घोषित कुछ जलवायु लक्ष्यों की समय-सीमा 2030 में समाप्त हो रही है, वे एक-दूसरे से सीखने और अपने संबंधित उद्देश्यों की उपलब्धि को सुविधाजनक बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे। जर्मनी इस साझेदारी के तहत 2030 तक कम से कम 10 अरब यूरो की नई और अतिरिक्त प्रतिबद्धताओं के दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ भारत को वित्तीय और तकनीकी सहयोग और अन्य सहायता देने का मजबूत इरादा रखता है। यह अन्य बातों के साथ-साथ जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के क्षेत्र में उनके महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की उपलब्धि में सहायता करेगा, जर्मन-भारतीय अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) को और बढ़ावा देगा, निजी निवेश को प्रोत्साहित करेगा और इस प्रकार आगे वित्त पोषण का लाभ उठाने का लक्ष्य तय करेगा। भारत और जर्मनी मौजूदा और भविष्य की प्रतिबद्धताओं के तेजी से कार्यान्वयन के महत्व पर बल देते हैं।

18. दोनों पक्ष अंतर सरकारी परामर्श (आईजीसी) के ढांचे के भीतर एक द्विवार्षिक मंत्रालयी तंत्र बनाने पर सहमत हुए जो इस साझेदारी को उच्च स्तरीय राजनीतिक दिशा प्रदान करेगा। जलवायु कार्रवाई, सतत विकास, ऊर्जा संक्रमण, विकास सहयोग और त्रिकोणीय सहयोग के क्षेत्र में सभी मौजूदा द्विपक्षीय प्रारूपों और पहलों से साझेदारी में योगदान होगा और मंत्रालयी तंत्र को इस दिशा में होने वाली प्रगति की जानकारी मिलती रहेगी।

19. दोनों पक्ष ऊर्जा संक्रमण, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत शहरी विकास, हरित गतिशीलता, परिपत्र अर्थव्यवस्था, शमन पर जलवायु कार्रवाई, जलवायु लचीलापन और अनुकूलन, कृषि-पारिस्थितिक परिवर्तन, जैव विविधता का उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्या कर सकते हैं इसकी पहचान करने की दिशा में काम करेंगे और नियमित आधार पर साझेदारी के उद्देश्यों पर हुई प्रगति का जायजा लेगें।

20. हरित और सतत विकास के लिए भारत-जर्मन साझेदारी को के व्यावहारिक रूप देने के लिए दोनों पक्ष इस पर सहमत हुए:

i. इंडो-जर्मन एनर्जी फोरम (आईजीईएफ) द्वारा समर्थित इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स के इनपुट के आधार पर एक इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप विकसित करना।

ii. एक न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण को सुगम बनाने के लिए बिजली ग्रिड, भंडारण और बाजार डिजाइन के लिए संबंधित चुनौतियों सहित नवीन सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक इंडो-जर्मन अक्षय ऊर्जा साझेदारी स्थापित करना। यह साझेदारी सौर प्रौद्योगिकियों के लिए एक चक्रीय अर्थव्यवस्था के निर्माण का भी समर्थन करेगी। जर्मनी ने उच्च गुणवत्ता वाली परियोजना की तैयारी और धन की उपलब्धता के आधार पर 2020 से 2025 तक 1 अरब यूरो तक के रियायती ऋण सहित वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान करने का इरादा व्यक्त करना।

iii. आय, खाद्य सुरक्षा, जलवायु लचीलापन, बेहतर मिट्टी, जैव विविधता, वन बहाली और पानी की उपलब्धता के मामले में भारत में ग्रामीण आबादी और छोटे पैमाने के किसानों को लाभान्वित करने के लिए "कृषि पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन" पर एक प्रकाशस्तंभ सहयोग स्थापित करना और विश्व स्तर पर भारतीय अनुभव को बढ़ावा देना । जर्मनी ने उच्च गुणवत्ता वाली परियोजना की तैयारी और धन की उपलब्धता के आधार पर 2025 तक 300 मिलियन यूरो तक के रियायती ऋण सहित वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान करने का इरादा व्यक्त किया।

iv. इसके अतिरिक्त हरित ऊर्जा गलियारों जैसे लेह-हरियाणा ट्रांसमिशन लाइन और कार्बन न्यूट्रल लद्दाख की परियोजना के संबंध में सहयोग के अवसरों का पता लगाना।

v. बॉन चैलेंज के तहत वन क्षेत्रों को बहाल करने में सहयोग को गहरा करना, गरीबी से लड़ने, जैव विविधता को संरक्षित करने और बहाल करने और जलवायु परिवर्तन को रोकने और कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में, गहन राजनीतिक साझेदारी के लिए एक रूपरेखा के रूप में पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली 2021-2030 पर संयुक्त राष्ट्र दशक लक्ष्य को स्वीकार करना और स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र के क्षेत्र को बढ़ाने और उनके नुकसान, विखंडन और कमी को समाप्त करने के लिए बातचीत और त्वरित कार्रवाई।

vi. वायु प्रदूषण में कमी लाने सहित हरित प्रौद्योगिकियों के सफल और सतत उपयोग के लिए उपयुक्त परिस्थितियों के निर्माण पर गहन सहयोग करना।

vii. विकास के लिए व्यक्तिगत क्षमताओं और अनुभवों के आधार पर त्रिकोणीय सहयोग पर मिलकर काम करना और एसडीजी और जलवायु लक्ष्यों की उपलब्धि का समर्थन करने के लिए तीसरे देशों में टिकाऊ, व्यवहार्य और समावेशी परियोजनाओं की पेशकश करना।

21. इसके अलावा हरित और सतत विकास के लिए भारत-जर्मनी भागीदारी के संदर्भ में, दोनों पक्षों ने मौजूदा पहलों की प्रगति का स्वागत किया जिसमें शामिल हैं:

i. भारत-जर्मनी ऊर्जा मंच 2006 में शुरू हुआ और इस साझेदारी के तहत प्रमुख सहयोग कार्यक्रम शुरू किए गए। वे इसके सामरिक आयाम और निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ाने पर सहमत हुए।

ii भारत-जर्मनी पर्यावरण मंच (IGEnvF) के भीतर सहयोग, जिसकी अंतिम बैठक फरवरी 2019 में दिल्ली में हुई थी। वे दोनों देशों के संघीय ढांचे को ध्यान में रखते हुए प्रांतीय और नगरपालिका अधिकारियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने का प्रयास करते हैं।

iii. जैव विविधता पर संयुक्त कार्य समूह की अंतिम बैठकें फरवरी 2021 में हुई थीं, जहां दोनों पक्षों ने सीबीडी सीओपी15 में मजबूत लक्ष्यों के साथ 2020 के बाद के वैश्विक जैव विविधता ढांचे को अपनाने के लिए अपने समर्थन को रेखांकित किया और मूर्त सहयोग की स्थापना की दिशा में काम करने का इरादा व्यक्त किया।

iv. अपशिष्ट और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर संयुक्त कार्य समूह द्वारा विशेष रूप से दोनों देशों के बीच सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान को और तेज करने के लिए अच्छे अवसर बनाए गए हैं। वे एसडीजी लक्ष्य 14.1 में निर्धारित समुद्री पर्यावरण में कचरे, विशेष रूप से प्लास्टिक कचरे को रोकने,एसडीजी लक्ष्य 8.2 (तकनीकी उन्नयन और नवाचार), 11.6 (नगरपालिका और अन्य अपशिष्ट प्रबंधन), 12.5 (पुनर्चक्रण और कचरे में कमी) और इस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए महत्वाकांक्षी उद्देश्यों और नीतियों के प्रभावी और कुशल कार्यान्वयन का समर्थन करके भारत-जर्मनी पर्यावरण सहयोग को जारी रखने और तेज करने पर सहमत हुए। । भारत और जर्मनी प्लास्टिक प्रदूषण पर वैश्विक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते की स्थापना के लिए यूएनईए में निकट सहयोग करने पर सहमत हुए।

v. ग्रीन अर्बन मोबिलिटी पर इंडो-जर्मन पार्टनरशिप, 2019 में लॉन्च हुई और मूल विकास सहयोग के तौर तरीके विकसित किये गये। मेट्रो, लाइट मेट्रो, ईंधन कुशल और कम उत्सर्जन वाली इलेक्ट्रिक बस प्रणाली, गैर-मोटर चालित परिवहन जैसे परिवहन के स्थायी साधनों के एकीकरण का समर्थन करने के लिए त्वरित कार्रवाई और सहयोग की परिकल्पना की गई है, और 2031 तक साझेदारी में संयुक्त कार्य के लिए ठोस लक्ष्यों पर काम करने की दृष्टि से सभी के लिए टिकाऊ गतिशीलता की एकीकृत योजना की सुविधा प्रदान करना है।

vi. देश के पहले एसडीजी शहरी सूचकांक और डैशबोर्ड (2021-22) को विकसित करने में नीति आयोग और बीएमजेड के बीच सहयोग का उद्देश्य शहर के स्तर पर एसडीजी स्थानीयकरण को मजबूत करना और डेटा-संचालित निर्णय लेने को सक्षम बनाने के साथ-साथ राज्य और जिला स्तर पर एसडीजी कार्यान्वयन के लिए योजनाओं को बढ़ावा देना है।

22. दोनों पक्षों ने अंतर्राष्ट्रीय स्मार्ट सिटी नेटवर्क के भीतर शहरी विकास के अपने सफल सहयोग को जारी रखने के इरादे को दोहराया। स्मार्ट सिटी के विषय पर बहुपक्षीय अनुभव साझा करने और सीखने को बढ़ावा देने के लिए वे 2022 में एक आपसी स्मार्ट सिटी ऑनलाइन-संगोष्ठी आयोजित करने पर सहमत हुए।

23. पेरिस समझौते और एजेंडा-2030 द्वारा निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए टिकाऊ और लचीले शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्षों ने सतत शहरी विकास पर संयुक्त भारत-जर्मनी कार्य समूह की नियमित बैठकों को जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

24. दोनों पक्षों ने कृषि, खाद्य उद्योग और उपभोक्ता संरक्षण पर संयुक्त कार्य समूह की रचनात्मक भूमिका की पुष्टि की, जिसकी मार्च 2021 में अंतिम बैठक हुई थी। उन्होंने प्राप्त परिणामों के बारे में संतोष व्यक्त किया और टिकाऊ कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, कृषि प्रशिक्षण और कौशल, कटाई के बाद प्रबंधन और कृषि रसद के क्षेत्रों में मौजूदा समझौता ज्ञापनों के आधार पर सहयोग की निरंतर इच्छा व्यक्त की।

25. दोनों सरकारों ने टिकाऊ कृषि उत्पादन के आधार के रूप में उच्च गुणवत्ता वाले बीजों तक किसानों की पहुंच को बढ़ावा देने में योगदान देने के लिए भारतीय बीज क्षेत्र में शुरु की गई प्रमुख परियोजना के अंतिम चरण में पहुंचने की सराहना की। उन्होंने अगस्त, 2021 में शुरू की गई दूसरी द्विपक्षीय सहयोग परियोजना का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य भारत के कृषि बाजार के विकास को सशक्त और आधुनिक बनाने के लिए हो रहे सुधार प्रयासों का समर्थन करना है।

26. दोनों पक्षों ने मौजूदा सहयोग समझौतों के आधार पर खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग गतिविधियों को विकसित करने की इच्छा व्यक्त की।

27. दोनों पक्षों ने कमियों को पाटने और किसानों और खेतिहर श्रमिकों के कौशल का उन्नयन करते हुए भारत में कृषि क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से "कृषि के क्षेत्र में भारत-जर्मन उत्कृष्टता केंद्र" की स्थापना पर जर्मन कृषि व्यवसाय गठबंधन (जीएए) और भारतीय कृषि कौशल परिषद (एएससीआई) के बीच समझौता ज्ञापन को स्वीकार किया।

28. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि खाद्य और कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और ज्ञान हस्तांतरण अधिक टिकाऊ खाद्य प्रणालियों की कुंजी है और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में "बुंडेसइंस्टिट्यूट फर रिसिकोबेवर्टुंग" (बीएफआर) और एफएसएसएआई द्वारा तैयार अनुसंधान सहयोग परियोजनाओं पर विचार किया जा सकता है।

29. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए): दोनों पक्ष सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की रणनीतिक प्राथमिकताओं और संबद्ध वैश्विक सहयोग प्रयासों के तालमेल के आधार पर सहयोग और समर्थन को गहरा करने पर सहमत हुए।

द इंसुरेसिलियंस ग्लोबल पार्टनरशिप एंड द कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर:

30.दोनों पक्ष जलवायु और आपदा जोखिमों से निबटने के लिए एक सक्षम वित्तीय और बीमा समाधानों के साथ साथ जरूरी कौशल विकास के लिए वैश्विक पहल के माध्यम से सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए।

31. दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र को संगठित करने के लिए विशेष रूप से DeveloPPP और संरचित वित्त पोषण तंत्र के माध्यम से एसडीजी और जलवायु लक्ष्यों में नवाचार और निवेश के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के संदर्भ में भारतीय और जर्मन निजी क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

32.दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र 2023 जल सम्मेलन की तैयारी के लिए प्रसन्नता व्यक्त की और सतत विकास के लिए एजेंडा-2030 के एसडीजी-6 और अन्य जल संबंधी लक्ष्यों के प्रति अपने समर्थन को रेखांकित किया।

व्यापार, निवेश और डिजिटल परिवर्तन के लिए साझेदारी

33. जर्मनी और भारत ने नियम-आधारित, खुले, समावेशी, मुक्त और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार प्रणाली के महत्व का निरंतर पालन करने वाले देशों की सराहना करते हुए बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और विकासशील देशों को एकीकृत करने के केंद्रीय स्तंभ के रूप में विश्व व्यापार संगठन के महत्व पर प्रकाश डाला। दोनों सरकारें अपने सिद्धांतों और कार्यों को मजबूत करने, विशेष रूप से अपीलीय निकाय की स्वायत्तता के साथ-साथ दो स्तरीय अपीलीय निकाय के संरक्षण के उद्देश्य से विश्व व्यापार संगठन में सुधार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

34. जर्मनी और भारत महत्वपूर्ण व्यापार और निवेश भागीदार हैं। दोनों पक्षों ने एक मुक्त व्यापार समझौते, एक निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेतों पर एक समझौते पर यूरोपीय संघ और भारत के बीच आगामी वार्ता के लिए अपना मजबूत समर्थन व्यक्त किया, और द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के विस्तार के लिए ऐसे समझौतों की व्यापक क्षमता को रेखांकित किया।

35. जर्मनी और भारत ने व्यापार और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के मार्गदर्शक सिद्धांतों और बहुराष्ट्रीय उद्यमों के लिए ओईसीडी दिशानिर्देशों को एक स्थायी और समावेशी आर्थिक सुधार के अनिवार्य हिस्से के रूप में लागू करने के महत्व पर बल दिया। दोनों सरकारों का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला, विविध, जिम्मेदार और टिकाऊ बनाना है। दोनों सरकारें यह सुनिश्चित करने के लिए एक साथ काम करने की आवश्यकता पर जोर देती हैं कि आपूर्ति श्रृंखलाएं अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण, श्रम और सामाजिक मानकों को बनाए रखते हुए आर्थिक लाभ लाना जारी रख सकें।

36. दशकों में विश्व स्तर पर नौकरियों और सबसे बड़े सामाजिक संकट में से एक की पृष्ठभूमि में, दोनों पक्षों ने स्थायी श्रम बाजारों के निर्माण के लिए एक साथ काम करने और एक लचीला, समावेशी, लैंगिग नजरिए से उत्तरदायी और संसाधन कुशल व्यवस्था की बहाली के लक्ष्य के महत्व को पहचाना। इसका लक्ष्य रोजगार और कामकाज के बेहतर माहौल को बढ़ावा देना है जिसमें फिर से कौशल विकास की ऐसी नीतियां शुरु करने की आवश्यकता है जो कामकाजी उम्र के सभी लोगों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप काम करने में सक्षम बनाती हैं और एक ऐसी उत्तरदायी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाती है जो गरीबी से लड़ सकती है और असमानताओं को कम कर सकती है।

37. जर्मनी ने 2017 में भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलनों 138 और 182 के अनुमोदन का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने एसडीजी 8.7 के अनुरूप बाल और जबरन श्रम जैसी कुरीति से लड़ने के महत्व को रेखांकित किया और इन क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत करने का इरादा व्यक्त किया। उन्होंने कामकाज के सभ्य तरीकों और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल माध्यम से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नीतियों के आदान-प्रदान को विस्तार दिए जाने का स्वागत किया।

38. दोनों पक्षों ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के लिए एक प्रमुख चालक के रूप में डिजिटल परिवर्तन के महत्व को स्वीकार किया। इंडो-जर्मन डिजिटल डायलॉग इंटरनेट गवर्नेंस, उभरती प्रौद्योगिकियों और डिजिटल बिजनेस मॉडल जैसे डिजिटल विषयों पर सहयोग की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। साथ ही, उन्होंने उद्योग-संचालित इंडो-जर्मन डिजिटल विशेषज्ञ समूह जैसी अन्य मौजूदा पहलों के साथ तालमेल से लाभ उठाने के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया।

39. कराधान के क्षेत्र में, दोनों पक्षों ने 8 अक्टूबर 2021 को ओईसीडी समावेशी फ्रेमवर्क ऑन बेस इरोजन एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग (बीईपीएस) में दो समाधान समझौते का स्वागत किया। दोनों सरकारों ने इच्छा व्यक्त की कि ऐसे समाधान सरल होने चाहिए जिससे प्रक्रिया समावेशी होगी और सभी व्यवसायों के लिए एक निष्पक्ष और खुली व्यवस्था बनाई जा सकेगी जो अंतरराष्ट्रीय कर प्रणालियों को स्थिरता प्रदान करने में योगदान देगी। यह व्यवसायों के बीच हानिकार होड़ को राकने में मदद करेगी, अत्याधिक बोझ वाली कर योजना को समाप्त करेगी और इस बात की गारंटी देगी कि बहुराष्ट्रीय उद्यम अंततः करों के अपने उचित हिस्से का ही भुगतान करें। जर्मनी और भारत ने दोनों ने दोहरे कराधान बचाव समझौते में संशोधन करने की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

40. द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में, दोनों पक्षों ने इंडो-जर्मन फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म के सफल प्रारूप को जारी रखने के लिए अपनी तत्परता को रेखांकित किया, जो वर्तमान और भविष्य के निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ साबित हुआ है। फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म की अर्ध-वार्षिक बैठकों के अलावा, दोनों पक्षों ने व्यापार को सुगम बनाने के संबंध में दोनों देशों की कंपनियों और निवेशकों से जुड़े क्षेत्र विशेष और सामान्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से एक-दूसरे के साथ जुड़ें रहने की बात कही।

41. दोनों पक्षों ने कॉर्पोरेट प्रबंधकों ("प्रबंधक कार्यक्रम") के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करके द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अपनी तत्परता की पुष्टि की। इस संदर्भ में, दोनों पक्षों ने एक संयुक्त आशय की घोषणा पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया जिसके द्वारा उन्होंने उद्योगों के प्रबंधकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करने में लगातार मिलकर काम करने की व्यवस्था की है। दोनों पक्षों ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि इस सहयोग ने उनके द्विपक्षीय वाणिज्य और व्यापार के विकास, व्यावसायिक अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत और व्यावसायिक संपर्कों को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच आपसी समझ को गहरा करने में ठोस परिणाम प्राप्त करने में योगदान दिया है।

42. भारत ने रेलवे के क्षेत्र में जर्मनी की कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता को स्वीकार किया। रेलवे में भविष्य के सहयोग पर जर्मनी के आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्रालय और भारतीय रेल मंत्रालय के बीच 2019 में हस्ताक्षरित संयुक्त घोषणा के आधार पर दोनों पक्षों ने उच्च गति और ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकियों में आगे और सहयोग करने में अपनी निरंतर रुचि को रेखांकित किया। भारतीय रेलवे की, 2030 तक नेट जीरो बनने की महत्वाकांक्षा है।

43. जर्मनी और भारत ने मानकीकरण, प्रत्यायन, अनुरूपता मूल्यांकन और बाजार निगरानी के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के अपने निरंतर प्रयासों के लिए ग्लोबल प्रोजेक्ट क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर (जीपीक्यूआई) के भीतर इंडो-जर्मन वर्किंग ग्रुप की सराहना की। दोनों पक्षों ने वर्किंग ग्रुप की 8वीं वार्षिक बैठक के दौरान हस्ताक्षरित 2022 के लिए कार्य योजना पर गौर किया जो डिजिटलीकरण, स्मार्ट और टिकाऊ खेती/कृषि और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करता है।

44. दोनों सरकारों ने स्टार्ट-अप सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की और इस संदर्भ में स्टार्ट-अप इंडिया और जर्मन एक्सेलेरेटर (जीए) के बीच चल रहे सहयोग की सराहना की। उन्होंने 2023 से इंडिया मार्केट एक्सेस प्रोग्राम की पेशकश करके अपने समर्थन को और बढ़ाने के (जीए)के इरादे का स्वागत किया और दोनों स्टार्ट-अप समुदायों का प्रोत्साहित करने के लिए जीए के साथ साझेदारी में एक साझा जुड़ाव मॉडल विकसित करने के स्टार्ट-अप इंडिया के प्रस्ताव का स्वागत किया।

राजनीतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान, वैज्ञानिक सहयोग, कार्यबल और लोगों की मोबिलिटी के लिए साझेदारी

45. दोनों सरकारों ने छात्रों, शिक्षाविदों और पेशेवर कार्यबल सहित लोगों से लोगों के बीच सक्रिय आदान-प्रदान का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने अपनी उच्च शिक्षा प्रणालियों के अंतर्राष्ट्रीयकरण का विस्तार करने, दोनों देशों के नवाचार और अनुसंधान परिदृश्य को आगे बढ़ाने और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए दोहरी संरचनाओं को मजबूत करने के लिए एक-दूसरे के प्रयासों का समर्थन करने पर सहमति व्यक्त की।

46. ​​जर्मनी और भारत ने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते आदान-प्रदान पर संतोष व्यक्त किया और आगे और सहयोग बढ़ाने का इरादा किया। दोनों सरकारों ने जर्मनी के विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम में चयनित भारतीय छात्रों को सक्षम बनाने के लिए डिजिटल प्रारंभिक पाठ्यक्रम (स्टूडिएनकोलेग) स्थापित करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। भारत ने कहा कि वह स्टडी इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के तहत छात्रों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगी और भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में जर्मनी के छात्रों को प्रवेश की सुविधा प्रदान करेगी। दोनों सरकारों ने संयुक्त डिग्री और दोहरी डिग्री की सुविधा के रूप में भारत और जर्मनी के विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग का पता लगाने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का भी स्वागत किया।

47. यह स्वीकार करते हुए कि भारत-जर्मन रणनीतिक अनुसंधान और विकास साझेदारी को उत्प्रेरित करने के लिए अकादमिक-उद्योग सहयोग महत्वपूर्ण है, दोनों पक्षों ने युवा भारतीय शोधकर्ताओं के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में अनुभव प्राप्त करने के उद्देश्य से औद्योगिक फैलोशिप का समर्थन करने के वास्ते भारत-जर्मन विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) की हालिया पहल का स्वागत किया। जर्मन औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में, विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान में महिला भागीदारी (WISER) कार्यक्रम की एस एंड टी परियोजनाओं में महिला शोधकर्ताओं के बाद में प्रवेश की सुविधा के लिए और भारत-जर्मन S & T सहयोग के लिए एक समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हुए प्रारंभिक कैरियर फेलोशिप को जोड़ा गया।

48. उन्होंने विशेष रूप से द्विपक्षीय विज्ञान सहयोग के आधार के रूप में डार्मस्टाट में एंटीप्रोटॉन और आयन अनुसंधान (एफएआईआर) के लिए अंतर्राष्ट्रीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया।

49. दोनों सरकारों ने व्यापक प्रवासन और मोबिलिटी साझेदारी पर जर्मनी और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते से संबधित वार्ता को अंतिम रूप देने का स्वागत किया, जैसा कि अंग्रेजी भाषा में मसौदा समझौते के आज के आरंभ द्वारा प्रलेखित है। वे समझौते पर तेजी से हस्ताक्षर करने और इसे लागू करने के लिए कार्रवाई करने पर सहमत हुए। उन्होंने छात्रों, पेशेवरों और शोधकर्ताओं की दो-तरफा मोबिलिटी को सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ अवैध अप्रवास की चुनौतियों का समाधान करने में इस समझौते के महत्व पर प्रकाश डाला।

50. दोनों सरकारों ने कुशल स्वास्थ्य और देखभाल कर्मियों के अप्रवास के संबंध में जर्मन संघीय रोजगार एजेंसी (बीए) और केरल राज्य द्वारा प्लेसमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। इसका उद्धेश्य एक समग्र "ट्रिपल-विन अप्रोच" को लागू करके, मूल देश और मेजबान देश के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रवासियों को भी लाभ पहुंचाना है। उन्होंने केरल राज्य के साथ प्लेसमेंट समझौते से परे जर्मनी और भारत में श्रम बाजारों के साथ-साथ स्वयं प्रवासियों के हितों पर उचित विचार करते हुए विभिन्न व्यावसायिक समूहों में भारत के अन्य राज्यों के साथभी अपने सहयोग के विस्तार के लक्ष्य का स्वागत किया।

51. दोनों सरकारों ने काम के दौरान सुरक्षा और स्वास्थ्य तथा सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में जर्मन सामाजिक दुर्घटना बीमा (डीजीयूवी) और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का भी स्वागत किया जिसमें काम काज के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और बीमारियों से बचाव की व्यवस्था की गई है। व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए जर्मन सामाजिक दुर्घटना बीमा (डीजीयूवी) और भारत के महानिदेशालय कारखाना सलाह सेवा और श्रम संस्थान (डीजीएफएएसएलआई) के बीच हुए समझौते का भी स्वागत किया गया।

52. दोनों सरकारों ने जर्मनी और भारत के बीच पर्याप्त सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षिक सहयोग को बढ़ाने में गोएथे-इंस्टीट्यूट, जर्मन अकादमिक विनिमय सेवा (डीएएडी), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और अन्य संबंधित संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने शैक्षिक और संवाद प्रारूपों के माध्यम से ऐसे संपर्कों को सुविधाजनक बनाने में जर्मन पॉलिटिकल फाउंडेशन की भूमिका को स्वीकार किया।

वैश्विक स्वास्थ्य के लिए साझेदारी

53. यह मानते हुए कि कोविड -19 महामारी खुले समाज और बहुपक्षीय सहयोग के लचीलेपन के लिए एक परीक्षा की घड़ी पेश कर रही है और इसके लिए बहुपक्षीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता है, दोनों सरकारें चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने,वैश्विक तैयारियों को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य आपात स्थिति और भविष्य के जूनोटिक जोखिमों को कम करने और एक-स्वास्थ्य-दृष्टिकोण पर सहम​त हुईं। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित कार्यों और भविष्य की महामारियों का जवाब देने की क्षमता पर उचित निर्देश देने और समन्वय स्थापित करने के प्राधिकरण के रूप में विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ में सुधार और उसे और मजबूत बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने व्यापार और पर्यटन के लिए लोगों की मुक्त आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के महत्व को स्वीकार किया और कोविड-19 टीकों और टीकाकरण प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

54. दोनों पक्षों ने अत्यधिक रोगजनक जीवों के परीक्षण के लिए बांदा, उत्तर प्रदेश में जैव-सुरक्षा स्तर IV प्रयोगशाला (बीएसएल-4) की स्थापना के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने में भारत के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और जर्मनी के रॉबर्ट-कोच-इंस्टीट्यूट (आरकेआई) के बीच सहयोग का स्वागत किया।

55. दोनों सरकारों ने भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत गठित केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और जर्मन संघीय गणराज्य (बीएफएआरएम) के ड्रग्स और चिकित्सा उपकरण संस्थान और (पीईआई) के पॉल-रएर्लिच-इंस्टीट्यूट के साथ एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करके चिकित्सा उत्पादों के विनियमन के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की अपनी मंशा व्यक्त की।

56. दोनों सरकारों ने छठे आईजीसी में आयोजित विचार-विमर्श की एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर करके चिकित्सा उत्पादों के विनियमन के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की अपनी मंशा व्यक्त की और भारत-जर्मन सामरिक साझेदारी को और विस्तारित और गहरा करने के लिए अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर शोल्ज को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य और छठे आईजीसी के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया। भारत अगले आईजीसी की मेजबानी के लिए उत्सुक है।

बर्लिन
मई 02, 2022



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