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प्रधान मंत्री की जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस की यात्रा पर विदेश सचिव द्वारा विशेष वार्ता का प्रतिलेख (मई01, 2022)

मई 01, 2022

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: आप सभी को नमस्कार । रविवार की दोपहर को यहाँ बड़ी संख्या में आपको देखकर बहुत अच्छा लगा। जैसा कि आप जानते हैं, हम यहाँ प्रधान मंत्री की तीन यूरोपीय देशों की यात्रा की पूर्व संध्या पर एक बहुत ही विशेष मीडिया वार्ता में मिल रहे हैं। और यह विशिष्ट सौभाग्य और प्रसन्नता की बात है कि हमारे साथ नए विदेश सचिव श्री विनय क्वात्रा हैं, जिन्होंने अभी-अभी कार्यभार ग्रहण किया है और महोदय मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि आप यहाँ आएँ और इस यात्रा की जानकारी दें और हमें प्रधान मंत्री की इस भागीदारी के महत्व के बारे में समझाएँ । मंच पर हमारे साथ सचिव (पश्चिम) श्री संजय वर्मा के साथ-साथ मंत्रालय में मध्य यूरोप डिवीजन की देखरेख करने वाली अतिरिक्त सचिव नीता भूषण भी हैं।मैं विदेश सचिव महोदय से कुछ प्रारंभिक उद्घाटन टिप्पणी करने का अनुरोध करूँगा, जिसके बाद हम कुछ प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करेंगे।कृपया ध्यान दें कि उन्होंने अभी-अभी कार्यभार संभाला है और हम आज बहुत अधिक प्रश्नों को समायोजित नहीं कर पाएँगे। महोदय, अब मंच आपका है।

श्री विनय क्वात्रा, विदेश सचिव: बहुत-बहुत धन्यवाद। औररविवार होने के बावजूद आज दोपहर इतनी बड़ी संख्या में यहाँ आने के लिए मीडिया के मित्रों को बहुत-बहुत नमस्कार।जैसा कि आप सभी जानते हैं, प्रधानमंत्री कल से यूरोप की यात्रा के लिए रवाना होंगे।वह द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कार्यक्रमों के लिए जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस की यात्रा करेंगे। प्रधान मंत्री के तीन दिवसीय, तीन देशों के दौरे में पर्याप्त और व्यापक एजेंडा के साथ गहन कार्यक्रम है, जिसमें इन देशों के राजनीतिक नेतृत्व, भारतीय प्रवासियों और शीर्ष उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ व्यापक बातचीत शामिल है।

सबसे पहले मैं जर्मनी से शुरू करता हूँ, जो कि पहला गंतव्य है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि जर्मनी के पास जी7 की अध्यक्षता भी है।2 मई, कल, प्रधान मंत्री जर्मन चांसलर, महामहिम ओलाफ स्कोल्ज़ के साथ बर्लिन में भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) के छठे संस्करण की सह-मेजबानी करेंगे।पिछले दिसंबर में पदभार ग्रहण करने के बाद चांसलर स्कोल्ज़ के साथ प्रधान मंत्री की यह पहली बैठक होगी।आपको याद होगा कि 2022 में किसी विदेशी नेता के साथ प्रधानमंत्री की पहली टेलीफोन कॉल चांसलर स्कोल्ज़ के साथ हुई थी। दोनों नेताओं के बीच बैठक न केवल मौजूदा, बहुआयामी द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगी, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच आने वाले महीनों और वर्षों के लिए सहयोग के एक महत्वाकांक्षी एजेंडा को आकार देगी और विकसित करेगी,जिसमें विकास साझेदारी, हरित एजेंडा, व्यापार निवेश संबंध, और समग्र रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र शामिल हैं।

मैं संक्षेप में अंतर-सरकारी परामर्श तंत्र के बारे में बात करना चाहता हूँ जिसकी छठी बैठक कल होगी। यह एक अनूठा तंत्र है जो दोनों पक्षों के कई मंत्रियों और अधिकारियों को द्विपक्षीय चर्चा में शामिल होने के लिए एक साथ लाता है, जो अंततः एक पूर्ण सत्र बनता है जिसकी अध्यक्षता दोनों नेताओं द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की समीक्षा करने, जायजा लेने और मूल्यांकन करने के साथ-साथ साझेदारी के नए क्षेत्रों की पहचान भी करने के लिए की जाती है। आईजीसी के पूर्ण सत्र में सहयोग पर मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।पहला, विदेश मामले और सुरक्षा। दो, आर्थिक वित्तीय नीति, वैज्ञानिक और सामाजिक विनिमय। तीन, जलवायु, पर्यावरण, सतत विकास और ऊर्जा। आईजीसी के दौरान, प्रधान मंत्री को वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री सहित भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी। मैं यहाँ उल्लेख करना चाहूँगा कि आईजीसी के विचार-विमर्श में माननीय प्रधान मंत्री की सहायता करने के अलावा इन मंत्रियों का अपना एक अलग और अपने स्वयं का मूल कार्यक्रम भी होगा।इसके बाद आईजीसी के बाद एक उच्च स्तरीय गोलमेज बैठक होगी जहाँ प्रधान मंत्री मोदी और चांसलर स्कोल्ज़ दोनों देशों के शीर्ष सीईओ के साथ बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री बाद में जर्मनी में भारतीय प्रवासियों से बातचीत करेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे। जैसा कि आप जानते हैं, पिछले कुछ वर्षों में कोविडके कारण अंतर्राष्ट्रीय यात्रा में बाधा आई है, इसलिए प्रधान मंत्री के लिए भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत करने का यह एक रोमांचक अवसर होगा।

शाम को चांसलर स्कोल्ज़ प्रधानमंत्री के लिए एक निजी रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। 3 मई को, जर्मन यात्रा चरण के समापन के बाद, प्रधान मंत्री डेनमार्क की प्रधान मंत्री, मिस मेट फ्रेडरिकसेन के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा पर कोपेनहेगन की यात्रा करेंगे।यह प्रधान मंत्री की डेनमार्क की पहली यात्रा होगी लेकिन डेनमार्क के प्रधान मंत्री के साथ उनकी तीसरी शिखर स्तरीय बातचीत और चर्चा द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक हित के मुद्दों पर केंद्रित होगी।भारत और डेनमार्क के प्रधान मंत्री बाद में भारत-डेनमार्क व्यापार मंच के तत्वावधान में दोनों देशों के व्यापारिक नेताओं के साथ बातचीत करेंगे।उस बिंदु से ठीक पहले, जिसका मुझे उल्लेख करना चाहिए था, प्रधान मंत्री डेनमार्क की महामहिम महारानी मार्ग्रेथ II से भी मुलाकात करेंगे, जो प्रधान मंत्री के लिए आधिकारिक रात्रिभोज की मेजबानी भी करेंगी। जर्मनी की तरह,डेनमार्क में भी प्रधानमंत्री एक सामुदायिक कार्यक्रम के दौरान प्रवासी भारतीय सदस्यों के साथ बातचीत करेंगे।मुझे कहना चाहिए कि डेनमार्क के साथ साझेदारी के सार में कई महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इसमें ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप शामिल है, जो सहयोग का एक मॉडल है जो अक्षय ऊर्जा, स्थिरता और हरित विकास पर केंद्रित है।पाँच साल के लिए एक संयुक्त कार्य योजना भी है, जो अनिवार्य रूप से इस साझेदारी की बारीकियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। और यह पवन ऊर्जा, जल प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी, शिपिंग और स्मार्ट सिटी के क्षेत्र में चल रहे सहयोग के अलावा है । यह यात्रा हमारे लिए कौशल विकास, नौवहन, कृषि प्रौद्योगिकी और गतिशीलता के क्षेत्र में साझेदारी के नए तत्वों को आकार देने का एक अवसर होगी।

4 मई को, प्रधान मंत्री डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के प्रधानमंत्रियों के साथ दूसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।लेकिन शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले, प्रधान मंत्री नॉर्वे, स्वीडन, आइसलैंड और फिनलैंड के नेताओं के साथ द्विपक्षीय शिखर बैठक भी करेंगे। मोटे तौर पर, नॉर्डिक देशों और शिखर सम्मेलन के संबंध में चर्चा की विशिष्टता और परिणाम यात्रा के जारी रहते बाद में सामने आएंगे, मोटे तौर पर, नॉर्डिक देशों के साथ भारत की साझेदारी चार से पाँच समूहों के आसपास संरचित है।और इन समूहों में अगर मैं उन्हें सूचीबद्ध करता हूँ तो इसमें शामिल होंगे: 1. हरित साझेदारी, 2. डिजिटल और नवाचार अर्थव्यवस्था का संपूर्ण स्थान, 3. अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश संबंध, 4. सतत विकास, और 5. आर्कटिक क्षेत्र से संबंधित साझेदारी। नॉर्डिक शिखर सम्मेलन इन समूहों में एजेंडा को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। मुझे यहाँ यह उल्लेख करना चाहिए कि संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसके साथ नॉर्डिक देशों की शिखर स्तरीय बैठकें हैं, जिसका मैंने अभी उल्लेख किया है।

4 मई को कोपेनहेगन से वापस लौटते समय, प्रधान मंत्री पेरिस, फ्रांस में थोड़ी देर रुकेंगे। जैसा कि आप जानते हैं, फ्रांस, भारत और यूरोप का एक महत्वपूर्ण भागीदार है, और वर्तमान में यूरोपीय संघ का अध्यक्ष भी है। जैसा कि आप भी जानते हैं कि राष्ट्रपति मैक्रों अभी-अभी दूसरे कार्यकाल के लिए विजयी हुए हैं और भारत-फ्रांस की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी में एक बड़ी गति रही है, इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के नेतृत्व के साथ-साथ उनकी घनिष्ठ मित्रता को धन्यवाद।प्रधान मंत्री की फ्रांस यात्रा हमें फ्रांस के राष्ट्रपति चुनावों के बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी, जैसा कि आप जानते हैं कि दोनों देशों ने विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा पर्यावरण, लोगों से लोगों के बीच संबंध, अंतरिक्ष, डिजिटल, उच्च अंत क्षेत्रों में विनिर्माण आदि जैसे क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी की महत्वाकांक्षा को लगातार पोषित और पूरा किया है। पेरिस में, प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति मैक्रों विभिन्न स्वरूपों में व्यापक वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री उसी रात 4 मई को फ्रांस से प्रस्थान करेंगे।

संक्षेप में, जैसा कि आपने भी देखा होगा, 2022 में प्रधान मंत्री की पहली यात्रा एक गहन कार्यक्रम में एक महत्वाकांक्षी और पर्याप्त एजेंडे को सन्निहित करती है। और जैसे जैसे यात्रा बढ़ेगी हमें इन तीन देशों में प्रधान मंत्री की भागीदारी के दौरान हुई चर्चाओं और परिणामों के विशिष्ट विवरणों को साझा करने में खुशी होगी। मैं एक बार फिर इस अवसर पर आप सभी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री जी के कल तड़के प्रस्थान से पहले आप आज दोपहर इस विशेष मीडिया वार्ता में भाग लेने के लिए भारी संख्या में यहाँ आए। फिर से बहुत बहुत धन्यवाद।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: बहुत-बहुत धन्यवाद, महोदय, इस व्यापक प्रस्तुति के लिए धन्यवाद। अब हम कुछ प्रश्न लेंगे। उससे पहले कुछ बुनियादी नियम, कृपया अपना और अपने संगठन का परिचय दें। और हम प्रति व्यक्ति एक प्रश्न लेने का प्रयास करेंगे। तो हम शुरू करते हैं,मैंने अभी आपका हाथ उठा हुआ देखा है, यशी, कृपया।

यशी : नमस्कार और नए विदेश सचिव बनने पर बधाई।

श्री विनय क्वात्रा, विदेश सचिव: धन्यवाद।

यशी : आपसे और अधिक मुलाकात होने की आशा है। मैं द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से यशी हूँ । महोदय, मेरा एक प्रश्न है जो आपकी आगामी यात्रा से नहीं बल्कि नेपाल से संबंधित है।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: रुकिए, रुकिए, यह अवसर नहीं है। यह प्रधान मंत्री की यात्रा के लिए विशेष वार्ता है। हम बाद में अन्य प्रश्नों को संबोधित करेंगे। तो अगर आपके पास इस विशिष्ट अवसर पर प्रश्न है, तो मैं ले लूँगा ।

श्री विनय क्वात्रा, विदेश सचिव: फिर भी, बधाई के लिए धन्यवाद।

मनीष कुमार झा : विदेश सचिव जी नमस्कार और फिर से पहले दिन की बधाई । आप रविवार को काम करते हैं, यह हमारे देश के लिए एक महान संकेत है। मैं मनीष कुमार झा हूँ। मैं बिजनेस वर्ल्ड फॉरेन अफेयर्स एंड डिफेंस का संपादक हूँ। मैं समझता हूँ कि प्रधान मंत्री की यह यात्रा यूरोपीय संघ के साथ हमारे संबंधों की आर्थिक और तकनीकी ताकत पर अधिक केंद्रित है, और निश्चित रूप से जर्मनी के संदर्भ में। जर्मनी, और यूरोपीय संघ की ओर से भी ग्लोबल गेटवे नामक किसी चीज़ में अग्रणी है, यह अवसंरचना के विकास के लिए भारत के पैमाने को अपनाने का एक बड़ा अवसर है। तो ग्लोबल गेटवे पर हमारा विचार क्या है?

विनीत दीक्षित: न्यूज़गेट से विनीत दीक्षित। क्या हम इस यात्रा को डॉ. जयशंकर के कहे अनुसार, यूक्रेन संकट का समाधान ढूँढना कह सकते हैं? क्या वे रूस से यूक्रेन से नॉर्डिक देशों के लिए एक विशेष संदेश ले जा रहे है, खासकर जब फिनलैंड और स्वीडन नाटो में शामिल होने वाले हैं, जो कि रूस को बहुत नापसंद होगा ।

विजयलक्ष्मी : बधाई हो महोदय, आप कार्यभार संभाला है और आप अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं. मैं विजयलक्ष्मी, इंडिया टीवीसे हूँ मैं, मैं यह जानना चाहती हूँ कि काफी महत्वपूर्ण visit है हालाँकि उन्होंने ने भी पूछा ukraineको लेकर के क्योकिं यूरोप प्रधानमंत्री जा रहे हैं, तो ऐसे में क्या हम उम्मीद करे कि उस विषय पर भी चर्चा होगी और भारत का stand अगर कुछ आप बता पाएं उस पर |

श्रीधर: महोदय, श्रीधर एशियाई युग से हूँ । मेरा प्रश्न कुछ हद तक उससे जुड़ा है जो दूसरों ने पूछा है, आप जानते हैं, नॉर्डिक देश विशेष रूप से रूस से खतरा महसूस कर रहे हैं। तो नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के साथ चर्चा के विषय के रूप में यूक्रेन कितना महत्वपूर्ण होगा?

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्‍ता: क्‍या मैं यहाँ बीच में कुछ कह सकता हूँ कि यदि यूक्रेन से संबंधित कोई अन्‍य प्रश्‍न हैं, तो क्‍या मैं उस मुद्दे को एक साथ ही ले सकता हूँ, यूक्रेन पर किसी का कुछ अलग प्रश्न है?हाँ, कृपया बताएँ ।

मानस: महोदय, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, पीटीआई से मानस हूँ । महोदय, यूक्रेन में जो कुछ हो रहा है उसकी पृष्ठभूमि में ऊर्जा सुरक्षा एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। दरअसल, यह राष्ट्रीय सुरक्षा शब्दावली का हिस्सा बन गया है। तो आप वास्तव में प्रधानमंत्री की तीन देशों की यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा को कैसे देखते हैं,विशेष रूप से राष्ट्रपति मैक्रों के साथ क्योंकि हमारे ऊर्जा क्षेत्र सहित फ्रांस के साथ बहुत मजबूत द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग है। बहुत-बहुत धन्यवाद।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्‍ता : महोदय, मैं इस दौर के प्रश्‍नों के लिए आपको मंच सौंपता हूँ ।

श्री विनय क्वात्रा, विदेश सचिव: बहुत-बहुत धन्यवाद। और मेरे कार्यभार ग्रहण पर शुभकामनाओं और बधाई के आपके गर्मजोशी भरे शब्दों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। यदि मैं आपके द्वारा पूछे गए प्रश्नों को दो भागों में संरचना करूँ तो मुझे लगता है कि यूक्रेन से संबंधित प्रश्नों का एक समूह है और यह है कि इस प्रश्न को प्रधान मंत्री की आगामी यात्रा के दौरान कैसे देखते हैं, दूसरा, एक प्रश्न था, जो शायदश्री मनीष झा ने पूछा था, जो ग्लोबल गेटवे के संबंध में था, कनेक्टिविटी का बड़ा सवाल था। और मुझे लगता है कि एक सूत्र जो सभी प्रश्नों के माध्यम से अनिवार्य रूप से संबंधित है कि उद्देश्यों और परिणामों के संदर्भ में यात्रा कहाँ स्थित है? इसलिए, मैं पहले अंतिम का उल्लेख करता हूँ, और फिर अन्य दो पर आता हूँ, क्योंकि मुझे लगता है कि यहाँ ध्यान देने योग्य बात यात्रा का मुख्य उद्देश्य है, यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के लिए यूरोप के प्रमुख देशों के साथ अपनी बहुआयामी, बहुमुखी भागीदारी को मजबूत करना जारी रखना है। जर्मनी की यात्रा, फ्रांस की यात्रा, दूसरे नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए यात्रा के साथ-साथ नॉर्डिक नेताओं के साथ व्यक्तिगत शिखर बैठक हमारे फोकस की एक बहुत स्पष्ट अभिव्यक्ति है कि हमारी साझेदारी का निर्माण किया गया है,यह हमारे संबंधों की मौजूदा ताकतों का निर्माण करता है, आगे के महीनों और वर्षों के एजेंडे को इस तरह से आकार देता है कि हम जिन देशों के साथ बातचीत करेंगे, इस बार प्रधानमंत्री नेताओं से मुलाकात करेंगे,इन देशों के साथ आर्थिक सहयोग, विकास साझेदारी, हरित एजेंडा आदि की दूरंदेशी, प्रगतिशील रणनीतिक साझेदारी को आकार देता है।

जब प्रधान मंत्री इन नेताओं के साथ बातचीत करेंगे, तो स्वाभाविक रूप से क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दे भी चर्चा में शामिल होंगे। लेकिन मुझे यह दोहराना और बार-बार कहना होगा कि यात्राओं और चर्चाओं का मुख्य फोकस विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी की संरचना करना और मजबूत करना है और निश्चित रूप से यूक्रेन के मुद्दों पर भी परिप्रेक्ष्य का आदान-प्रदान होगा । मेरे लिए यह टिप्पणी करना सही नहीं होगा कि यूरोप के प्रत्येक देश यूक्रेन के मुद्दे को कैसे देखते हैं।लेकिन मैं समझता हूँ कि जहाँ तक यूक्रेन पर भारत की स्थिति का संबंध है, इसे प्रवर्धित, स्पष्ट किया गया, अनेक मंचों पर विस्तृत रूप से प्रतिपादित किया गया है। और मैं इसके कुछ प्रमुख तत्वों का उल्लेख करूँगा। एक, हमारा हमेशा यह मानना रहा है कि यूक्रेन में शत्रुता का अंत होना चाहिए, और दूसरा, संकल्प का मार्ग कूटनीति और संवाद से होकर जाता है। और मुझे लगता है कि यूक्रेन में हमें जो कहना है, ये तीन रुख काफी हद तक स्पष्ट करते हैंऔर विजयलक्ष्मी जी आपके प्रश्न के उत्तर पर मैं इन्ही तीन चीजों के बारें में कहूँगा क्योकि आपका प्रश्न भी ukraineसे सम्बंधित है और उसके विषय मैं भी इन तीन चीजों को मद्धेनज़र रखना आवश्यक है | प्रथम ये की यात्रा के मुत्म उद्देश्य जो हैं वो एक सामरिक,सकारात्मक,आर्थिक, green agenda पे आधारित एक sustainable agenda निर्मित करना लेकिन जहाँ तक ukraineका प्रश्न हैं उसमें मुख्यतः hostilitiesका अंत तथा diplomacy डायलाग के माध्यम द्वारा समस्या समाधान वो ही ukraineका एक हमारा जो position हैं | जो की काफी समय से सरकार जो है बार बार आप सब के सामने एक ना एक forum में रख रही हैं | global gateway का जो प्रश्न था मनीष झा जी का|

आप सभी इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच कनेक्टिविटी साझेदारी का एक बहुत मजबूत तत्व है। और यह कनेक्टिविटी साझेदारी कई क्षेत्रों में संरचना करती है, आप इसे इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी, डिजिटल कनेक्टिविटी, वित्तीय कनेक्टिविटी, कई क्षेत्रों में भौतिक कनेक्टिविटी कह सकते हैं। अब, ग्लोबल गेटवे यूरोपीय संघ की एक पहल है और मुझे लगता है कि यह एक ऐसी चीज है जिस पर विस्तार से बताने के लिए यूरोपीय संघ कहीं बेहतर जगह होगी। लेकिन मुझे लगता है कि जहाँ तक हम इसे देखते हैं, इस क्षेत्र के देशों को अनिवार्य रूप से संवर्धन करने और एक साथ लाने वाली उन सभी कनेक्टिविटी पहलों का हमेशा स्वागत होगा, जो विकास साझेदारी को बढ़ावा देती है, जो उनकी अर्थव्यवस्थाओं के बीच कनेक्टिविटी से संबंधित संबंधों के विकास को बढ़ावा देता है, निश्चित रूप से, ग्लोबल गेटवे के समग्र स्थान के भीतर, यूरोपीय संघ के देशों और भारत के बीच व्यक्तिगत कनेक्टिविटी परियोजनाओं को कैसे संरचित किया जाता है, अनिवार्य रूप से उन नियमों और शर्तों का व्युत्पन्न होगा, जिन पर वे आकार लेते हैं और विकसित होते हैं।मुझे लगता है कि ग्लोबल गेटवे को हम कैसे देखते हैं, इस पर मैं यही कहूँगा। यह अंततः उन विशिष्ट परियोजनाओं का प्रश्न होगा जो ग्लोबल गेटवे से निकलती हैं और समग्र भारत-यूरोपीय संघ कनेक्टिविटी साझेदारी से भी अच्छी तरह से जुड़ती हैं। धन्यवाद।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: धन्यवाद महोदय। प्रश्नों का अगला दौर।

अखिलेश सुमन : स्वागत है महोदय। मैं संसद टीवी से अखिलेश सुमन हूँ। मेरा प्रश्‍न भारत और जर्मनी के बीच सांस्‍कृतिक संबंधों, लोगों से लोगों के बीच संपर्क से संबंधित है। मुझे पता है, लंबे समय से जर्मनी में एक अलग चांसलर था। और जर्मन भारतीय पाठ्यक्रम, भारतीय स्कूलों में काफी प्रचलित है। क्या आप ऐसा कोई प्रयास करने जा रहे हैं कि जर्मनी में कुछ भारतीय विषयों, भारतीय विद्या को बढ़ावा दिया जाए और जर्मन विश्वविद्यालय में कुछ कुर्सियों को बढ़ावा दिया जाए ताकि जर्मन लोग भी भारत के बारे में जितना वे अभी जानते हैं उससे अधिक बेहतर तरीके से जान सकें।

मेघना देव : महोदय, डीडी न्यूज से मेघना देव। महोदय, मैं व्यापार जगत के नेताओं के बारे में जानना चाहती थी जिनके साथ जर्मनी में प्रधान मंत्री मोदी और जर्मन चांसलर दोनों बैठक करेंगे, क्या वे कुछ क्षेत्र विशिष्ट व्यापार जगत के नेताओं, सीईओ से मिल रहे हैं? वहाँ के कुछ प्रसिद्ध नाम क्या हैं?

निवेदिता मुखर्जी : विदेश सचिव बनने के लिए बधाई महोदय । मैं स्वराज्य से निवेदिता हूं। मैं जानना चाहतीथी कि व्यापार के नए क्षेत्र कौन से हैं और भारत साझेदारी के संदर्भ में किन क्षेत्रों की खोज करेगा और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ प्रधान मंत्री की बैठक का एजेंडा क्या होगा।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: नए क्षेत्र, विशेष रूप से, कोई क्षेत्र या कोई विशिष्ट देश या आप क्या जानना चाहती हैं?

निवेदिता मुखर्जी: जर्मनी के साथ और डेनमार्क के साथ।

वक्ता 1 : मैं एआरडी जर्मन टीवी से हूँ । मेरे दो प्रश्न हैं। सबसे पहले, क्या यूक्रेन-रूस संघर्ष के संबंध में श्रीमान प्रधान मंत्री मोदी के पास चांसलर स्कोल्ज़ के लिए कोई संदेश है? और दूसरी बात, यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौते के बारे में क्या है? यह अभी भी लंबित है और क्या आप इसे प्राप्त करने का कोई अवसर देखते हैं?

कमलजीत संधू: नमस्ते, मैं इंडिया टुडे से कमलजीत संधू हैं। आपको बधाई महोदय। मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि क्या जर्मनी के साथ सुरक्षा संबंधी कोई मुद्दा उठाया जाएगा, विशेष रूप से जसविंदर सिंह मुल्तानी जो लुधियाना विस्फोट के आरोपी हैं,क्या कोई विशेष सूची होगी जिसे हम उनके साथ साझा करने जा रहे हैं या भारत से संबंधित सुरक्षा संबंधी किसी भी मामले पर चर्चा करने जा रहे हैं?

श्री विनय क्वात्रा, विदेश सचिव: मैं समझता हूँ कि ऊर्जा सुरक्षा तत्व से संबंधित पिछले दौर का श्री मानस का प्रश्न छूट गया था । तो चलिए सबसे पहले मैं इसका जवाब देता हूँ । मुझे लगता है कि ऊर्जा सुरक्षा का पूरा प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर महत्वपूर्ण भागीदार के साथ हमारी चर्चा का हमेशा एक हिस्सा रहा है और मुझे लगता है कि मैं शायद इस बात की बारीकियों को बताने के लिए स्वतंत्र नहीं हूँ कि क्या गठन हो सकता है।लेकिन मुझे लगता है कि यह स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा के बदलते तत्व, विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देशों पर इसका प्रभाव, उस क्षेत्र में चुनौतियाँ, उन चुनौतियों को दूर करना, उन चुनौतियों से निपटने के समाधान जो हम पा सकते हैं। स्वाभाविक रूप से, ये पूरे ब्रह्मांड के ऊर्जा सुरक्षा के कुछ प्रमुख तत्व हैं। और मुझे यकीन है कि यह समग्र चर्चाओं में से एक तत्व का गठन करेगा लेकिन स्वाभाविक रूप से, एक एकल मद परिभाषित नहीं करेगा कि उन चर्चाओं की संरचना क्या होगी। दूसरे दौर के प्रश्नों पर आ रहा हूँ, अगर मैं सही हूँ, तो एक था ...

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: महोदय, हमारे पास अखिलेश सुमन से सांस्कृतिक सहयोग के बारे में एक प्रश्न था, व्यापारिक नेताओं पर, मेघना ने आंतरिक कौन लोग होंगे के बारे में जानना चाहा और निवेदिता ने जर्मनी के साथ नए क्षेत्रों के बारे में पूछा।

श्री विनय क्वात्रा, विदेश सचिव: सांस्कृतिक सहयोग पर, मुझे लगता है कि उत्तर स्वाभाविक रूप से सकारात्मक होना चाहिए, क्योंकि मुझे लगता है कि यह दोनों देशों के बीच काफी बड़े वादे का क्षेत्र है, इस क्षेत्र में पहले ही बहुत कुछ किया जा चुका है, और और भी बहुत कुछ किया जाना जारी रहेगा, चाहे वह जर्मनी में भारत की कुर्सियों की स्थापना के संदर्भ में हो, या किसी अन्य रूप या प्रारूप में, जिसमें इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।आप जानते हैं, व्यापार चर्चा के लिए विशिष्ट एजेंडे के संबंध में, शीर्ष सीईओ कौन होंगे जो उपस्थित होंगे? मुझे लगता है कि मैं केवल इतना कहूँगा कि यह यात्रा न केवल भारतीय सीईओ और जर्मन सीईओ के लिए और भारत-डेनिश सीईओ फोरम के मामले में, डेनमार्क के बिजनेस सीईओ के लिए एक उत्कृष्ट अवसर होगा,एक साथ आने और इस बारे में परिप्रेक्ष्य साझा करने के लिए कि कोविड के बाद की दुनिया हमें कैसे एक साथ काम करने के नए अवसर प्रदान करती है। मुझे लगता है कि यह सीईओ के लिए दोनों नेताओं के साथ बातचीत करने का एक अवसर भी होगा, यह देखने के लिए कि सरकारें और व्यवसाय कैसे अधिक गहरी साझेदारी, नई साझेदारी, नए डोमेन में साझेदारी की संरचना कर सकते हैं, ताकि बात की जा सके। और, स्पष्ट रूप से, अवसरों का चहुमुखी सेट जो पिछले दो वर्षों में कोविड, और उन से हमारे अनुभवों ने हमें पेश किया है।इसलिए, मुझे लगता है कि शायद मैं आपको अलग-अलग एजेंडा मदों का विवरण विशेष रूप से नहीं बता पाऊँगा। लेकिन यहाँ विचार दो अर्थव्यवस्थाओं की पूरकताओं का सृजन और दोहन करना है, और अर्थव्यवस्थाओं के लिए पूरकता के भीतर विशिष्ट डोमेन को देखना है जिसमें वे सटीक क्षमता है जो यूरोप के देशों के बीच मेल खाते हैं, इस मामले में डेनमार्क और जर्मनी को पेश करना है और भारत को क्या पेशकश करनी है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत में जर्मनी और नॉर्डिक दोनों देशों की व्यापारिक कंपनियों की पहले से ही बड़ी और पर्याप्त उपस्थिति है। और इसी तरह, भारतीय उद्योग भी बहुत बारीकी से, सभी क्षेत्रों में बहुत गहनता से, चाहे वह विनिर्माण हो,चाहे वह सेवा क्षेत्र हो, चाहे वह सह-डिज़ाइन का क्षेत्र हो, उत्पादों का सह-विकास, समाधान, प्लेटफ़ॉर्म-आधारित ऐप समाधान, मुझे लगता है कि डिजिटल इनोवेशन स्पेस वास्तव में इतना सीमाहीन है, आप यह भी नहीं जानते कि यह कहाँ से उत्पन्न होता है और कहाँ फलीभूत होता है।इसलिए, मुझे लगता है कि ये सभी किसी न किसी रूप में दोनों नेताओं और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के बीच चर्चा के एजेंडे में स्वाभाविक रूप से शामिल होंगे।लेकिन जैसा कि मैंने कहा, इस स्तर पर, विशिष्ट एजेंडा मदों को सूचीबद्ध करना उचित नहीं होगा। मुझे लगता है कि यूक्रेन पर महामहिम स्कोल्ज़ को प्रधान मंत्री के संदेश पर, मैंने पहले ही प्रतिपादित कर दिया है कि हम यूक्रेन में चीजों को कैसे देखते हैं,और मुझे विश्वास है कि यह किसी न किसी स्तर पर दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुद्दा होगा, क्योंकि यह प्रधान मंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के पिछले हाल के आगंतुकों के बीच बातचीत का एक बिंदु रहा है, जिसमें ब्रिटेन के प्रधान मंत्री सहित, निश्चित रूप से, यूरोपीय संघ में नहीं, यह ब्रिटेन है, और यूरोपीय संघ के राष्ट्रपति भी हैं जो हाल ही में यहाँ थे, इसलिए मुझे लगता है कि इस स्तर पर, मैं खुद को यहीं तक सीमित रखूँगा।

मैं जर्मनी के साथ सुरक्षा संबंधों के पहलुओं पर नजर डालूँगा । मुझे लगता है कि सुरक्षा पर चर्चा या यों कहें, मैं कहूँगा कि रक्षा सहयोग में मैं सुरक्षा का एक तत्व शामिल करूँगा, जो हमारी चर्चाओं का एक महत्वपूर्ण तत्व है।इनमें से बहुत सी चर्चाएं कानूनी प्रक्रियाओं सहित प्रक्रिया आधारित भी हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से चर्चा के दौरान और शायद चर्चा से पहले भी उठेंगी, और हम इस मामले में दूसरी तरफ संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।रक्षा दरअसल, कुछ ऐसा है जैसा कि मैंने कहा था जो हमारी प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण रूप से शामिल है, लेकिन हम इसे सह-विकास, सह-डिजाइन, सह-विनिर्माण के संदर्भ में देख रहे हैं, अनिवार्य रूप से, जो आंतरिक रूप से आत्मानिर्भर की अवधारणा से जुड़ा हुआ है,रक्षा क्षेत्र सहित, जब हम अपने विदेशी भागीदारों के साथ बातचीत करते हैं।

मुक्त व्यापार समझौते के संबंध में, यूरोपीय संघ के साथ चर्चा चल रही है, और यह समझ बन रही है कि आगे चलकर इन चर्चाओं के शुभारंभ में काफी प्रगति हुई है। और वे चर्चाएं जारी रहेंगी ताकि चर्चाओं की शुरूआत के विशिष्ट तत्वों के साथ-साथ वार्ता पर भी सहमति हो सके और जब भी उन पर कोई स्पष्ट निर्णय हो तो आपके सामने लाया जा सके।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: धन्यवाद महोदय। अंतिम दो प्रश्न।

नयनिमा: आपका स्वागत है महोदय, द प्रिंट से नयनिमा हूँ । मैं बस इस यात्रा में समझना चाहती थी, क्या हम उम्मीद कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री जी 7 शिखर सम्मेलन के लिए निमंत्रण प्राप्त करेंगे? धन्यवाद।

रंजना: वेलकम सर, यूएनआई से रंजना। इसलिए पिछली बार जब फ्रांस के रक्षा मंत्री आए थे, तो उन्होंने भारत को और राफेल की पेशकश की थी। तो क्या यह भी फ्रांस के राष्ट्रपति और इंडो पैसिफिक फोरम के साथ चर्चा का हिस्सा होगा, जो फरवरी में विदेश मंत्री के जाने के समय हुआ,क्या इंडो पैसिफिक में भारत की भागीदारी पर कोई आगे की गति होगी जैसे इंडो पैसिफिक क्षेत्र में यूरोपीय संघ के साथ भारत की भागीदारी?

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: क्षमा करें, क्या आप पिछले भाग को दोहरा सकते हैं, मुझे भी समझ नहीं आया। जैसा कि आप जानते हैं, यूरोप के पास इंडो पैसिफिक रणनीति है, आपके मन में वास्तव में क्या था?

रंजना: इंडो पैसिफिक फोरम जिसमें विदेश मंत्री ने फरवरी में भाग लिया था, तो क्या हम उस पर आगे गतिविधि देखेंगे? उसमें भारत की भागीदारी?

नीरज : Sir नीरज News 18 indiaसे, प्रधानमंत्री के साथ जो भी मंत्री जा रहें हैं वो Germany तक दौरे में रहेंगे या Denmark या France भी जाएंगे वो लोग ?

संजीव त्रिवेदी : Welcome Sir मेरा नाम संजीव त्रिवेदी हैं, मैं news 24 channel से हूँ | sir एक सवाल समझ में नही आ रहा है कि किस तरह से रखा जाए लेकिन आप इस बात को समझें की अभी बोरिश जॉनसन साहब आएं और इसके बाद प्रधानमंत्री जा रहे हैं France, Germany | तीन बड़े देश युरोप के और इसके आलावा NORDIC country से मुलाकात | ये सब के सब जो देश हैं ये हमारा जो view point है जो ukraineपर उससे इतर इनका view point है, ये russiaके लिए critical हैं हम नही है | तो क्या diplomatic niceties होती हैं उसके दायरे में ये जो भारत का पक्ष हैं कि आप तो उनसे energy के लिए संबंध रखते है कायम और हमें वहां से समझाने की कोशिश करते हैं की हमे critical होना चाहिए क्या इस बात को भी प्रधानमंत्री रखेंगें वहां पर?

वक्ता 2: विदेश सचिव आपने उल्लेख किया है, तो प्रश्न को और आगे बढ़ाने के लिए, उन्नत प्रौद्योगिकी के संदर्भ में कोई विशिष्ट सहयोग?क्योंकि हम पैसे की तलाश में हैं हम जर्मनी के साथ प्रणोदन प्रणाली की तलाश में थे। तो रक्षा के पूरे संदर्भ में कोई विशेष बात कृपया?

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्‍ता : महोदय, इससे पहले कि मैं मंच सौंपूं,बस कुछ टिप्‍पणियाँ। एक मुझे लगता है, नयनिमा आपने जी7 के बारे में पूछा।आपका अनुमान है कि कोई निमंत्रण नहीं है, है ना? यही है जहाँ से आप शुरू कर रहे हैं, सही? ऐसे आयोजनों पर किसी भी तरह से, आप जानते हैं, मानक लाइन चूँकि विदेश सचिव नएहैं । सही अवसर होगा जिसमें आप मुझे उम्मीद से बहुत सी बातें कहते हुए सुनेंगे आशा है यदि यह यात्रा वास्तव में होती है और कब होती है।और दूसरा तत्व जो मैंने अभी लिखा है, मैं इस इंडो पैसिफिक फोरम के हिस्से पर एक त्वरित टिप्पणी करूंगा, मुझे अभी भी यकीन नहीं है कि आपका क्या मतलब है, लेकिन मैं विदेश सचिव को इसे पास करने दूँगा और आगेऔर संदीप जी आपने जो पूछा, ukraineपर हम जो कर चुके थे चर्चातो आपने फिर से पूछा तो ठीक हैं

श्री विनय क्वात्रा, विदेश सचिव: सबसे पहले मैं रक्षा साझेदारी के बारे में बात करना चाहता हूँ, क्योंकि इससे जुड़े दो प्रश्न थे।मुझे लगता है कि आप सभी जानते हैं कि रणनीतिक साझेदारी के समग्र क्षेत्र में, और रक्षा के क्षेत्र सहित, भारत और फ्रांस के बीच एक व्यापक और बहुत महत्वपूर्ण साझेदारी है। लेकिन मुझे लगता है कि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन साझेदारियों के तत्व वास्तव में उन हिस्सों तक फैले हुए हैं, जो हमारी प्रमुख प्राथमिकताएं भी हैं,जिनका मैंने पहले एक प्रश्न के उत्तर में उल्लेख किया था, वे अनिवार्य रूप से सह-डिजाइन, सह-विकास, सह-उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते हैं,वे भारत में निर्माण कर रहे हैं।और मुझे लगता है कि उन्हें केवल एक विशेष वस्तु या किसी अन्य के व्यापार के संदर्भ में स्थान देना सही नहीं होगा। इसलिए मैं समझता हूँ कि यही वह जगह है जहाँ हम इन देशों के साथ रक्षा साझेदारी की बात करते हैं, यही वह जगह है जहाँ हम आगे आएंगे और यही हमारी प्राथमिकता है। और ठीक इसी तरह हम इसे अपनी विचार प्रक्रियाओं के हिस्से के रूप में इन देशों के साथ उठाते हैं, के संबंध मेंजो आपका प्रश्न था कि ukraineसे संबंध में एक जो हमारा मत है और एक जो दुसरे देशों का मत हैं, उस मत को हम किस प्रकार से प्रभावशाली रूप से प्रकट करते हैं | देखिए जैसा मैंने आपसे पहले भी कहा जहाँ तक ukraineका संबंध है भारत की जो position इसमें रही है वो स्पष्ट रही है | प्रथम की hostilities का cessation होना चाहिए, दूसरा इसका समाधान diplomacy और dialogue के द्वारा होना चाहिए और मेरे ख्याल से ये मत बहुत ही स्पष्ट, बहुत ही प्रत्यक्ष रूप से हमारे जो partners हैं, यूरोपियन partners हैं,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पे जो हमारे बाकि सहयोगी हैं उन सबको पूर्णतः स्पष्ट है | मुझे नही लगता की इसके बारें में किसी प्रकार का कोई संकोच होना चाहिए और जब भी इस विषय में वार्ता होगी, जहाँ भी इस विषय में वार्ता होगी मुझे विश्वास है कि हमारे मत की पूर्णतः से स्पष्टीकरण ना सिर्फ स्पष्टीकरण उसका जो परिपेक्ष है और उसकी जो महत्वता है और उसके जो साकारात्मक पहलू हैं | आप मत में केवल मत की प्रस्तावना नही, मत में केवल मत में जो सकारात्मक दृष्टिकोण हैं उसका भी उजागर होना अनिवार्य है, वो भी इस प्रकार से कर रहा हूँ | मेरे को इस बारें में कोई शंका, शुबा नही है की जो हमारे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पे जो partners है उनको इस बात की समझ हैं ना केवल समझ है बल्कि i think deep appreciation भी सरकार के पक्ष में हैं और क्या था ?

नीरज जी जैसा की मैंने पहले भी कहा अपने प्रारंभिक टिप्पणी में कि international government consultations का जो mechanisms है उसमें प्रधामंत्री जी की सहायता के लिए हमारे यहाँ से वरिष्ट मंत्रीगण उपस्थित रहेंगे उसमें माननीय वित्तमंत्री जी, माननीय अर्थमंत्री जी और मंत्री science and technology क्षेत्र के भी रहेंगे| | उनमें से मेरे लिए इस समय कहना मुश्किल है की denmarkके delegation का भाग क्या क्या होगा ? लेकिन हम उम्मीद कर रहें हैं कि उसमें intergovernmental consultation का जो format हैं नीरज जी उसका जो format है जो structure है उसकी संरचना इस प्रकार से है कि बाकि मंत्रीगण जो है और वो अपने discussion अपने counter part के साथ करते हैं और फिर तीन stands में जो discussion होती है तो वो अपने preliminary में प्रस्तुत किया जाता है और preliminary का जो निर्देश हैं वो नेतागण जो हैं वो स्पष्टरूप में मिलकर करते हैं |

इंडो पैसिफिक पर देखें, जैसा कि आप जानते हैं कि यूरोपीय संघ की इंडो पैसिफिक रणनीति है, हमने खुद कई देशों के साथ इंडो पैसिफिक क्षेत्र में कई साझेदारियाँ बनाई हैं,जो इस पूरे क्षेत्र (अश्रव्य) में आर्थिक साझेदारी, जलवायु परिवर्तन भागीदारी, क्षमता निर्माण साझेदारी, मानव संसाधन विकास भागीदारी में उपलब्ध अवसरों का दोहन करने के लिए हैं।और इसके कई पहलू हैं जो सामने आते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि अंततः, इंडो पैसिफिक में प्रत्येक देश अपनी इंडो पैसिफिक रणनीति के हिस्से के रूप में, इसे विशुद्ध रूप से अवसरों के संदर्भ में देखेगा, जिस पर वे एक साथ काम कर सकते हैं, और उन चुनौतियों को कम करने के लिए सहयोग भी करेगा, जिनका सामना उन्होंने उस क्षेत्र में आम तौर पर एक साथ किया था। धन्यवाद।

श्री अरिंदम बागची, सरकारी प्रवक्ता: धन्यवाद महोदय। इसके लिए इतना समय देने के लिए धन्यवाद क्योंकि मुझे पता है कि अभी भी बहुत सारे प्रश्न हैं। सचिव (पश्चिम) श्री संजय वर्मा और अपर सचिव नीता भूषण को भी धन्यवाद। आज हमसे जुड़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद। कृपया हमारे सोशल मीडिया हैंडल आदि के संपर्क में रहें। हम अगले तीन, चार दिनों में प्रधान मंत्री की यात्रा के बारे में आपके लिए विवरण लाते रहेंगे। धन्यवाद। नमस्कार।



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