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हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए आसियान आउटलुक में सहयोग पर आसियान-भारत संयुक्त वक्तव्य

अक्तूबर 28, 2021

28 अक्टूबर 2021 को 18वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के अवसर पर हम, दक्षिण पूर्वी एशिाई देशों के संगठन (आसियान) के सदस्य देश और भारत गणराज्य;

1992 में आसियान-भारत संवाद की शुरुआत के बाद से हमारे संबंधों को आगे बढ़ाने वाले मौलिक सिद्धांतों, साझा मूल्यों और मानदंडों द्वारा निर्देशित आसियान-भारत रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। इसमें आसियान चार्टर,दक्षिण पूर्व एशिया मैत्री और सहयोग की संधि(टीएसी), आसियान कम्युनिटी विजन-2025,हिन्द प्रशांत पर आसियान आउटलुक(एओआईपी), संपर्क पर आसियान मास्टर प्लान(एमपीएसी), आसियान समेकित कार्य योजना (आईएआई) , साझा हित वाले संबंधों के सिद्धांतो पर आधारित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की घोषणा-2011 (ईएएस) , भारत-आसियान संवाद-2011 की 20 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में जारी विजन परिपत्र और भारत-आसियान संवाद -2018 की 25 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में जारी दिल्ली घोषणा में निहित मौलिक सिद्धांत भी शांमिल हैं।

आसियान-भारत सामरिक साझेदारी के लिए एक मजबूत नींव के रूप में हम कई सदियों से दक्षिण पूर्व एशिया और भारत के बीच सभ्यतागत संबंधों, समुद्री संपर्क और परस्पर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान को याद करते हैं;

लगातार आसियान-भारत कार्य योजनाओं द्वारा निर्देशित बहुआयामी जुड़ावों के माध्यम से आसियान-भारत संबंधों के लगभग तीन दशकों में प्राप्त उपलब्धियों पर संतोष व्यक्त करते हैं;

एओआईपी के उन उद्देश्यों और सिद्धांतों की पुष्टि करते हैं, जो हिंद प्रशांत आसियान नीति के केन्द्र में है और जिसमें एक खुले, पारदर्शी, समावेशी, एक नियम-आधारित ढांचे, सुशासन और परस्पर एक दूसरे को सम्मान देने वाले वाले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्रों में आसियान की भागीदारी का मार्गदर्शन करते हैं। इनमें संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप, मौजूदा सहयोग ढांचे के साथ पूरकता, समानता, आपसी सम्मान, आपसी विश्वास, पारस्परिक लाभ और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए सम्मान, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर, 1982 समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) संयुक्त राष्ट्र की संधियाँ और सम्मेलन, आसियान चार्टर और प्रासंगिक आसियान संधियाँ और समझौते शामिल हैं। हम इसके अलावा बाहरी भागीदारों को एओआईपी में पहचाने गए चार प्रमुख क्षेत्रों पर व्यावहारिक सहयोग करने के लिए आसियान के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं;

यह ध्यान में रखते हुए कि एओआईपी और भारत की हिंद-प्रशांत समुद्री पहल (आईपीओआई) दोनों शांति और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक मौलिक सिद्धांतों को साझा करते हैं;

हमने तय किया है कि :

1. हम आसियान-भारत सहित आसियान के नेतृत्व वाले प्रासंगिक मौजूदा तंत्र और मंचों का उपयोग करते हुए राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और विकास सहयोग के सभी पहलुओं के साथ ही आसियान भारत सम्मेलन, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस), भारत के साथ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (पीएमसी+1), आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ), आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस), और विस्तारित आसियान समुद्री मंच ( ईएएमएफ)का उपयोग करते हुए आसियान समुदाय के साथ ही आसियान-भारत सामरिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे और इसके लिए इन बातों पर अमल किया जाएगा;

2. सामुदायिक सहयोग की प्रक्रियाओं से बनी आसियान-केंद्रित क्षेत्रीय व्यवस्था को चुनौतियों से निबटने में मजबूत बनाना और मौजूदा क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर मिल रहे अवसरों आर्थिक सहयोग और विश्वास के जरिए एक खुले, समावेशी और नियम-आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को आकार देना।

3. एओआईपी और आईपीओआई के बीच संभावित सहयोग की संभावनाओं का पता लगाकर आसियान-भारत रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना जारी रखना जिनमें एओआईपी में उल्लिखित चार क्षेत्रों , अर्थात् समुद्री सहयोग, संपर्क, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी), और आर्थिक तथा सहयोग के अन्य संभावित क्षेत्र शामिल हैं।

4. मौजूदा सहयोग को बढ़ाना और निम्नलिखित क्षेत्रों/गतिविधियों में संभावित सहयोग के अवसरों का पता लगाना शामिल है लेकिन जो इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

4. मौजूदा सहयोग को बढ़ाना और निम्नलिखित क्षेत्रों/गतिविधियों में संभावित सहयोग का पता लगाना जिसमें ये शामिल हो सकते हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:

4.1. आईएआई कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन को सहारा देने के लिए अन्य के साथ क्षमता निर्माण, छात्रवृत्ति के प्रावधान, पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और कार्यशालाओं और सक्रिय हितधारकों के बीच परस्पर संपर्क के माध्यम से विकास के अंतराल को कम करना;

4.2. व्यापार सुविधा बढ़ाने और आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र के उपयोग में वृद्धि सहित आसियान-भारत आर्थिक संबंधों को मजबूत करना;

4.3. प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों को लक्षित करते हुए सामाजिक अवसंरचना विकास; आसियान व्यापक पुनर्प्राप्ति ढांचे का समर्थन करना; सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना; महामारी और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए तैयारियों और प्रतिक्रिया के साथ ही वैक्सीन और दवा अनुसंधान, विकास, निर्माण और वितरण के लिए क्षमता बढ़ाना तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में विश्वविद्यालयों और अनुसंधान एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना;

4.4.जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों ज़ूनोज़ की रोकथाम और प्रबंधन, जिसमें अनुसंधान और अध्ययन शुरू करना और समर्थन करना, और डेटा, सूचना, प्रौद्योगिकी और उपकरण साझा करना शामिल है;

4.5. तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (टीवीईटी) के माध्यम से मानव पूंजी विकास और आसियान टीवीईटी परिषद के लिए संभावित समर्थन;

4.6. शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, युवा, पर्यटन, मीडिया, और थिंक-टैंक तथा स्थानीय सरकारों / प्राधिकरणों जैसे क्षेत्रों की मदद से लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना

4.7. मौजूदा एमपीएसी 2025 को सुदृढ़ करने और भारत-प्रशांत क्षेत्र में समृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए सहयोग के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की खोज करना और उनसे संपर्क स्थापित करना ;

और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए), बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक), ब्रुनेई दारुस्सलाम-इंडोनेशिया-मलेशिया-फिलीपींस पूर्वी आसियान ग्रोथ एरिया(बीआईएमपी-ईएजीए), इंडोनेशिया-मलेशिया-थाईलैंड ग्रोथ ट्राएंगल (आईएमटी-जीटी) तथा मेकांग उप-क्षेत्रीय सहयोग ढांचा, जिसमें अय्यावाडी- चाओ फ्राया-मेकांग आर्थिक सहयोग रणनीति (एसीएमईसीएस) भी शामिल है, जैसे उप-क्षेत्रीय फ्रेमवर्क के साथ संभावित तालमेल की संभवनाओं का पता लगाना;

4.8. क्षेत्र में समुद्री परिवहन सहयोग;

4.9. सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सहयोग, जिसमें आपूर्ति-श्रृंखला जोखिमों और आईसीटी उत्पादों और प्रणालियों की कमजोरियों, आईसीटी सुरक्षा, क्षमता निर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था, डिजिटल कनेक्टिविटी, ई-कॉमर्स, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जैसे क्षेत्रों में ज्ञान साझा करने तथा मौजूदा राष्ट्रीय कानूनों और विनियमों और चौथी औद्योगिक क्रांति के अनुरूप बिग डेटा, क्रॉस-बॉर्डर डेटा प्रवाह के माध्यम से आईसीटी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है;

4.10. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए क्षमता निर्माण;

4.11. आसियान स्मार्ट सिटी नेटवर्क के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और विकास, स्मार्ट और हरित बुनियादी ढांचे और सतत शहरों का विकास;

4.12. सौर ऊर्जा सहित अक्षय, स्वच्छ और निम्न कार्बन ऊर्जा पर सहयोग सहित ऊर्जा सुरक्षा और साथ अन्य राष्ट्रीय मॉडल और प्राथमिकताएं जैसे जैव-परिपत्र-हरित विकास आदि ;4.10.

4.13. पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण में कमी, अपशिष्ट प्रबंधन, सीमा पार धुंध, समुद्री मलबे का प्रबंधन और समुद्री पर्यावरण संरक्षण के समाधान सहित;

4.14. विज्ञान आधारित हस्तक्षेपों का उपयोग करने, अच्छी प्रथाओं को साझा करने और विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में क्षेत्र की क्षमता को मजबूत करने सहित कृषि, पशुधन और मत्स्य क्षेत्रों का विकास;

4.15. नीली अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग की खोज सहित समुद्री संसाधनों का सतत प्रबंधन; और अवैध, गैर-सूचित और अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने के खिलाफ कार्रवाई;

4.16. समुद्री शिक्षा, अनुसंधान, विकास, नवाचार और पायलट परियोजनाओं पर सहयोग;

4.17. क्षेत्रीय क्षमता निर्माण के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण और प्रबंधन, और आसियान सेंटर फॉर बायोडायवर्सिटी (एसीबी) के काम के लिए समर्थन;

4.18. जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन, आपदा जोखिम में कमी और प्रबंधन, जिसमें आसियान चार्टर में उल्लिखित प्रासंगिक आसियान केंद्रों या संस्थानों के साथ सहयोग शामिल है;

4.19. आसियान सामुदायिक विजन 2025 और सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र 2030 एजेंडा के बीच पूरकता को बढ़ावा देना, जिसमें आसियान चार्टर के तहत प्रासंगिक आसियान केंद्रों, संस्थानों और तंत्र के साथ सहयोग जिसमें सतत विकास के लिए आसियान अध्ययन और संवाद (एसीएसडीएसडी) केंद्र भी शामिल हैं, जो इस क्षेत्र में सतत विकास सहयोग की सुविधा देते हैं ;

4.20. सूचना साझा करने, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के माध्यम से हरित विकास और सतत खपत और उत्पादन;

4.21. समुद्री सुरक्षा और जहाजों पर समुद्री डकैती और उनके खिलाफ सशस्त्र डकैती का मुकाबला करने के प्रयास, समुद्री सुरक्षा और खोज और बचाव (एसएआर) संचालन सहित समुद्री सहयोग, और,

आसियान-भारत तंत्र तथा आसियान के नेतृत्व वाले अन्य उपयुक्त तंत्र के माध्यम से सूचनाएं साझा करना।

हम क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए एओआईपी और आईपीओआई के बीच सहयोग की खोज करके आसियान-भारत रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयासों का स्वागत करते हैं।

वर्ष दो हजार इक्कीस के अट्ठाईस अक्टूबर को अपनाया गया।

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