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अबुजा में भारत-नाइजीरिया बिजनेस फोरम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की टिप्पणी (22 जनवरी, 2024)

जनवरी 23, 2024

मैंने कल शाम को भी लागोस में एक संक्षिप्त व्यावसायिक चर्चा की थी, और इससे वास्तव में मुझे वह बात समझ में आई जो मैंने अपनी ब्रीफिंग बुक्स में पहले पढ़ी थी, कि हमें अनुकूल माहौल में सुधार के उपाय खोजते रहना होगा। यह स्पष्ट है कि कुछ बैंकिंग चुनौतियाँ हैं, भुगतान संबंधी समस्याएँ हैं, कुछ यात्राओं संबंधी चिंताएँ हो सकती हैं। कई मामलों में हमने कुछ कदम उठाए हैं लेकिन अभी उनके परिणाम आने शेष हैं। विनियामक चुनौतियों के मामले में, अगर हम अपना पारस्परिक रूप से सहायक दृष्टिकोण देखें, जो कि एक प्रकार से सीआईआई और हमारे बिज़नेसों को भारत में हमारे नाइजीरियाई भागीदारों की समस्याओं को हल करने में सहायता कर सकता है, और ऐसा करने के फलस्वरूप नाइजीरिया में हमारे लिए और अधिक संभावनाएं खुल सकती हैं। मेरे विचार में बहुत कुछ संभव है।

इसलिए इसके तुरंत पश्चात, मैं अपने समकक्ष मंत्री तुग्गर के साथ बैठक के लिए और संयुक्त आयोग के सत्र के लिए विदेश मंत्रालय जाने की तैयारी कर रहा हूँ। मेरे साथ सरकार के अन्य विभागों के सहकर्मी भी शामिल होंगे। और जो परिदृश्य हम प्रस्तुत कर रहे हैं वह वास्तव में ऐसा है कि हमारा राजनीतिक नेतृत्व इस पर कार्य करना चाहेगा। यह एक बहुत ही स्पष्ट संदेश था जो हमने राष्ट्रपति टीनुबू से तब सुना था, जब वह पिछले वर्ष भारत आए थे। और यह एक संदेश एक ऐसी भावना है जिसके प्रत्युत्तर में प्रधानमंत्री मोदी जी भी बहुत दृढ़ता से अपनी भावनाएं स्पष्ट करते हैं।

इसलिए, हम इस व्यवस्‍था को आगे बढ़ाएंगे, बिज़नेस को प्रेरित करेंगे, जो भी बाधाएँ हैं उनका समाधान करेंगे, सुगमता भी प्रदान करेंगे और नए अवसरों की भी खोज करेंगे। क्योंकि प्रत्येक देश में बहुत सारे परिवर्तन होते हैं, यदि हम व्यावसायिक संभावनाओं के रूप में उनका दोहन कर सकें; और इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण डिजिटल क्षेत्र में है, और डिजिटल क्षेत्र के अलावा, यह पर्यावरण-अनुकूल और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी हो सकता है। मेरे विचार में कृषि में काफी संभावनाएं हैं। मैं अपने नाइजीरियाई मित्रों से कहना चाहूँगा कि हमने पिछले दशक में जल के क्षेत्र में, जल वितरण के क्षेत्र में, और विद्युत वितरण में वास्तव में काफी बड़े पैमाने पर उल्लेखनीय रूप से ठोस कार्य किया है।

इसलिए, हम अपने सीखे अनेक सबक और अनुभवों के लाभ यहां प्रदान करना चाहते हैं। हम निश्चित रूप से यह समझने का पूरा प्रयास करेंगे कि क्या प्रासंगिक होगा, और बिज़नेस की संभावनाएं कहां से उत्पन्न हो सकती हैं। और मैं नाइजीरियाई व्यवसायों को आश्वस्त करना चाहूँगा कि भारत में भी वे दो संभावनाएं बहुत स्पष्ट हैं। हम देखते हैं...मैं कहना चाहूँगा कि अगर आज, अगर भारत कुछ बड़े भू-राजनीतिक कदम उठा रहा है, तो उनमें से एक महत्त्वपूर्ण प्रयास अफ्रीका के उत्थान को दृष्टिगत रखते हुए किया जा रहा है। हमें पूरा विश्वास है कि अगले दशक तक हम यहां एक शानदार रूपांतरण होता देख पाएंगे। इसलिए, चाहे नए दूतावास खोलना हो, अधिकाधिक व्यापारिक और निवेश संबंधों को प्रोत्साहित करना हो, राजनीतिक संपर्कों के लिए अधिक अवसर सृजित करना हो, व्यवस्थाओं को वास्तव में एक-दूसरे को और अधिक निकटता से जानना हो, यह हमारा प्रमुख उद्देश्य है क्योंकि हम अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक नई शुरूआत करना चाहते हैं और यह भविष्य में नहीं बल्कि सचमुच अभी से ही करना होगा।

तो, मेरे ये कुछ विचार आपके समक्ष रखने के लिए मुझे यह संक्षिप्त अवसर प्रदान करने हेतु एक बार फिर से धन्यवाद और मुझे आशा है कि मैं आगामी चर्चाओं को अधिक उत्साहपूर्ण बनाने में किंचित योगदान कर सका हूँ।

एक बार फिर से आपका बहुत - बहुत धन्यवाद।

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